हमारा मिशन

राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सेवा मिशन

"सेवा ही साधना है, सुरक्षा ही संवेदना है, और समरसता ही सशक्त समाज की आधारशिला है।"

आचमन सेवा प्रकल्प का संकल्प केवल एक संस्था का संचालन करना नहीं, बल्कि भारत के प्रत्येक परिवार तक सेवा, सुरक्षा, संस्कार, आत्मीयता एवं सहयोग की भावना पहुँचाना है।

हमारा उद्देश्य किसी सरकारी अथवा वैधानिक संस्था का स्थान लेना नहीं है, बल्कि भारत सरकार, समाज, वैधानिक संस्थाओं तथा विधि-सम्मत संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर जनकल्याण का ऐसा आदर्श मॉडल विकसित करना है, जहाँ प्रत्येक सदस्य स्वयं को एक परिवार का अभिन्न अंग अनुभव करे।

हमारा संकल्प

हम संकल्प लेते हैं कि—

  • प्रत्येक सदस्य एवं उसके परिवार के सुख-दुःख में सहभागी बनेंगे।
  • सेवा को संगठन से ऊपर तथा मानवता को सभी भेदभावों से ऊपर रखेंगे।
  • सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं विधि-सम्मत व्यवस्था के साथ कार्य करेंगे।
  • प्रत्येक कार्य भारतीय संविधान एवं प्रचलित कानूनों के अनुरूप करेंगे।
  • समदृष्टि, समभाव एवं समरसता पर आधारित सेवा-संस्कृति का राष्ट्रव्यापी विस्तार करेंगे।

हमारा ध्येय

"साथ भी — सुरक्षा भी — सेवा भी — संस्कार भी।"

हमारा लक्ष्य – वर्ष 2035

  • भारत के प्रत्येक जिले में आचमन संगम की स्थापना।
  • लाखों सदस्यों को सेवा, सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याण से जोड़ना।
  • प्रत्येक परिवार तक शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, आत्मनिर्भरता एवं सहयोग की भावना पहुँचाना।
  • सेवा को जनआंदोलन बनाकर समरस, आत्मनिर्भर, संवेदनशील एवं सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देना।

सदस्य कल्याण एवं सहयोग योजना

योजना का नाम

आचमन सेवा प्रकल्प सदस्य कल्याण एवं सहयोग योजना

उद्देश्य

  • सेवा, सहयोग एवं संवेदना की भावना का विस्तार।
  • संकट की घड़ी में सदस्यों एवं उनके परिवारों के साथ खड़े रहना।
  • समाज में विश्वास, उत्तरदायित्व एवं पारस्परिक सहयोग की संस्कृति विकसित करना।

सदस्यता

  • केवल ट्रस्ट का विधिवत पंजीकृत सदस्य ही इस योजना से जुड़ सकेगा।
  • प्रत्येक सदस्य स्वेच्छा से सहयोग राशि प्रदान कर सकता है।
  • यह राशि दान/स्वैच्छिक सहयोग मानी जाएगी, बीमा प्रीमियम नहीं।

सहायता के क्षेत्र

उपलब्ध संसाधनों एवं नियमों के अनुसार निम्न परिस्थितियों में सहयोग प्रदान किया जा सकता है—

गंभीर बीमारी में सहायता।
आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में सहायता।
सदस्य के निधन पर शोक-सहयोग।
निर्धन कन्या विवाह सहायता।
शिक्षा एवं छात्रवृत्ति सहायता।
प्राकृतिक आपदा राहत।
अन्य विशेष मानवीय परिस्थितियों में सहायता।

सहायता की प्रक्रिया

  • निर्धारित आवेदन-पत्र एवं आवश्यक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाएँगे।
  • प्रबंध समिति प्रत्येक आवेदन का निष्पक्ष परीक्षण करेगी।
  • उपलब्ध निधि, आवश्यकता एवं नियमों के अनुसार सहायता स्वीकृत की जाएगी।
  • सहायता प्रदान करने अथवा न करने का अंतिम निर्णय प्रबंध समिति का होगा।

महत्वपूर्ण घोषणा

  • यह योजना किसी प्रकार की बीमा योजना नहीं है।
  • यह किसी प्रकार का बीमा अनुबंध, निवेश योजना अथवा गारंटीशुदा लाभ योजना नहीं है।
  • किसी सदस्य को किसी निश्चित राशि पर स्वचालित अथवा कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
  • सहायता केवल उपलब्ध संसाधनों, ट्रस्ट के नियमों एवं प्रबंध समिति के निर्णय के आधार पर प्रदान की जाएगी।
  • ट्रस्ट भविष्य की किसी घटना के लिए बीमा जैसी वित्तीय गारंटी प्रदान नहीं करता।

पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व

  • वार्षिक आय-व्यय एवं लेखा-जोखा नियमित रूप से संधारित किया जाएगा।
  • प्रत्येक सहायता का अभिलेख सुरक्षित रखा जाएगा।
  • समय-समय पर वैधानिक ऑडिट कराया जाएगा।
  • सदस्यों के प्रति पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

संशोधन

प्रबंध समिति आवश्यकता, परिस्थितियों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार समय-समय पर इस योजना के नियमों में संशोधन करने के लिए अधिकृत होगी।

वैधानिक नीति

यदि भविष्य में सदस्यों को जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा अथवा स्वास्थ्य बीमा जैसी गारंटीशुदा सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है, तो ट्रस्ट स्वयं बीमा प्रदाता के रूप में कार्य नहीं करेगा।

ऐसी सभी सेवाएँ केवल IRDAI से पंजीकृत बीमा कंपनियों की ग्रुप इंश्योरेंस योजनाओं अथवा अन्य वैधानिक योजनाओं के माध्यम से ही उपलब्ध कराई जाएँगी।

ट्रस्ट की भूमिका केवल—

  • सदस्यों को जोड़ने,
  • जागरूक करने,
  • आवश्यक दस्तावेज़ी सहायता प्रदान करने,
  • तथा संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने

तक सीमित रहेगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य पूर्ण कानूनी अनुपालन, पारदर्शिता तथा सदस्यों के हितों की सर्वोत्तम सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

समापन संदेश

"आचमन सेवा प्रकल्प का विश्वास है कि सेवा का सबसे बड़ा स्वरूप केवल सहायता देना नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार बनाना है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति यह अनुभव करे कि वह अकेला नहीं है। यही सेवा है, यही सुरक्षा है, यही समरसता है और यही राष्ट्र निर्माण का मार्ग है।"

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